एक विधालय शिक्षा समिति के महिला सचिव की सूझ – बुझ का परिणाम
By Uday Shankar , 08 Oct 2018

बिहार राज्य में प्रत्येक प्रारंभिक विधालय में विधालय शिक्षा समीति का गठन करना अब अनिवार्य  है | यह शिक्षा समिति 17 सदस्यों की समिति होती है और इसमें माताएं जिनके बच्चे उस उक्त विधालय में नामांकित है की 50% सदस्य्ता होना ज़रूरी  है | मैं आप लोगों से एक विधालय शिक्षा समिति की महिला सचिव के बारे में बताना चाहता हूँ जिन्होंने समिति में हो रहे पैसों के घपले पर रोक लगाने में मदद की | इनकी बात मुझे Accountability Initiative के द्वारा ज़िले में काम करते पता चली |

जिला काफी पिछड़ा हुआ है | शिक्षा समीति के अधिकांश सदस्य अनपढ़ और अनुसूचित जनजाति से संबन्ध रखते हैं | महिला सचिव भी पढ़ी लिखीं नहीं हैं | नियम के अनुसार सचिव और विधालय के प्रधानाध्यापक के बिना हस्ताक्षर से विधालय के खाते से एक रूपये की भी निकासी संभव नहीं है |

प्रधानाध्यापक महिला सचिव की असाक्षरता का फायेदा उठा कर उस महिला से खाली चेक पर हस्ताक्षर कराते थे और मनचाहा रकम बैंक से निकाल कर अपना व्यक्तिगत खर्च करते थे | महिला के पांचवीं कक्षा में पढ़ रहे बच्चे ने अपनी माँ के द्वारा खाली चेक पर हस्ताक्षर करने का विरोध किया | इसके बाद महिला सचिव ने रकम लिखने की मांग करि | जाहिर तौर पर प्रधानाध्यापक ने महिला सचिव को बोला की वह कोई फर्जी रकम नहीं निकाल रहे हैं |

जब सचिव नहीं मानी तोह यह बात प्रधानाध्यापक को नागावार गुज़री और उन्होंने विधालय शिक्षा समिति के बाकी सदस्यों के बिच यह अफवाह फैला दी की सचिव चेक पर हस्ताक्षर करने से पहले एक मोटी रकम की मांग करती हैं जिसके कारण विधालय में विकास कार्य बाधित हो रहा है | नियम के अनुसार समीति के अध्यक्ष पंचायती राज से चुने हुये प्रतिनिधि होते है | हर समिति को राज्य सरकार के तरफ से 9 कार्य और शक्तियों  का आवंटन किया गया है जिसमे मुख्य कार्य कुछ इस तरह है – विधालय के संचालन का अनुश्रवन करना, विधालय में प्राप्त विभिन्न स्रोतों से प्राप्त मदों का उचित उपयोग,  मध्याहन भोजन की देखरेख आदि | प्रधानाध्यापक ने यह भी अनुरोध किया की सचिव को हटाया जाए |

प्रधानाध्यापक की बात पुरे पंचायत में आग की तरह फैल गयी | महिला सचिव का घर से निकलना दुर्लभ हो गया | महिला सचिव ने अपनी व्यथा पंचायत के मुखिया को सुनाई | उन्होनें आम बैठक रखी जिसमे विधालय शिक्षा समिति के सभी सदस्य, पंचायत के शिक्षा प्रेमी सदस्य और विधालय के सभी शिक्षको को आमंत्रित किया गया | बैठक में महिला सचिव और प्रधानाध्यापक ने अपने पक्ष रखे जिसके बाद मुखिया ने प्रधानाध्यापक को  पिछले दो वितीय वर्षों में  निकाले गए रकम का पूरा वितीय रिकॉर्ड ब्यौरा दिखाने को कहा |

मुखिया और उनके सहयोगी के द्वारा विधालय के सभी वितीय रिकॉर्ड को बारीकी से देखा गया | गहन जांच – पड़ताल के बाद यह पाया गया की प्रधानाध्यापक ने विधालय का पैसा निकाला था जो कहीं  कोई कैशबुक या अन्य दस्तावेज़ में उल्लेखित नहीं किया गया था | बैठक में सर्वसम्मति से मुखिया ने यह फैसला सुनाया की प्रधानाध्यापक के द्वारा बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया  है इसलिए प्रधानाध्यापक को अपने खाते से विधालय के खाते में 1,00,000 रुपया जमा करना होगा |

महिला सचिव पर प्रधानाध्यापक के द्वारा लगाए गए आरोप को ख़ारिज किया गया और महिला सचिव को बैठक में मुखिया के द्वारा सम्मानित किया गया | मुखिया ने महिला सचिव को तारीफ़ करते हुए कहा की आज हमारे समाज में उपरोक्त तरह की कितने घटनाएँ घट रही होगी और उनका शोषण किया जा रहा होगा | आज प्रत्येक महिला को इस महिला सचिव से प्रेरित होने की आवश्यकता है और अपने शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद करने की आवश्यकता है |

इस प्रकार से महिला सचिव की सक्रिय भूमिका ने विधालय शिक्षा समीति का अस्तित्व बनाये रखा |


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